दिवाली
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दिवाली का त्यौहार, पांच दिन क... PowerPoint PPT Presentation


दिवाली का त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अश्विन महीने के अंत और कार्तिक के महीने के शुरू में, भारत के कई क्षेत्रों में एक पांच दिवसीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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Presentation Transcript


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दिवालीकात्यौहार, पांचदिनकाउत्सव, ३०

अक्टूबर

दिवालीकात्यौहार, दीपावली 30 अक्टूबर 2016

दिवालीकात्यौहारहिंदूकैलेंडरकेअश्विनमहीनेकेअंतऔरकार्तिककेमहीनेकेशुरूमें, भारतकेकई

क्षेत्रोंमेंएकपांचदिवसीयउत्सवकेरूपमेंमनायाजाताहै।अंग्रेजीकैलेंडरकेअनुसारदीवाली

आमतौरपरअक्टूबरकेअंतयानवंबरकीपूर्वार्धमेंपड़ताहै।शरदऋतुकीअंधेरीरातकोमिटटीका

दिया, मोमबत्तीऔरलालटेनसेप्रकाशितहोकरइसत्योहारकोविशेषरूपसेयादगारबनादेताहै।

दिवालीध्वनि, प्रकाशऔरआतिशबाजीकाभीत्यौहारहै।दिवालीपरपरिवारकेसभीसदस्यएकसाथ

मिलतेहैंऔरइसअवसरपरतरहतरहकेपकवानऔरमिठाईयांबनायींजातीहैं।

दिवालीकेत्यौहारकीतैयारीकईदिनपहलेशुरूहोजातीहै।यहत्यौहारऔपचारिकरूपसेदीवालीकी

रातसेदोदिनपहलेशुरूहोताहै, औरउसकेदोदिनबादसमाप्तहोताहै।प्रत्येकदिनकेख़ासरस्में

औरमहत्वहै:

धनतेरसदिवस (1)


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धनतेरस (भारतकेउत्तरीऔरपश्चिमीभागमेंमनाया) पांचदिनचलनेवालेदिवालीकेत्यौहारका

शुरुआतइसदिनसेहोताहै।धनतेरसकेपहलेदिनऔरइसदिनघरोंऔरव्यावसायिकपरिसरकोसाफ

कियाजाताहै , इनप्रतिष्ठानोंकानवीकरणऔरसजावटकियाजाताहै।महिलाएंऔरबच्चेरंगोलीके

साथप्रवेशद्वारसजातेहै।वेरचनात्मकरंगीनफर्शदोनोंकेअंदरडिजाइनऔरअपनेघरोंयादफ्तरों

केरास्तेमेंहैं।वेअपनेघरोंयादफ्तरोंकेरास्तेमेंऔरघरोंकेअंदररचनात्मकरंगीनफर्शपर

डिजाइनबनातेहैं।लड़केऔरपुरुषबाहरीप्रकाशसजावटऔरसभीतरहकेनवीनीकरणकाकामपूरा

करनेमेंव्यस्तहोतेहैं।कुछलोगोंइसदिनकीअच्छाईकेबलोंऔरबुराईकीताकतोंकेबीचसागरके

मंथनकेरूपमेंमानतेहै।


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इसदिनकोलक्ष्मीकेजन्मदिनकेरूपमेंभीमनायाजाताहै।धनऔरसमृद्धिकीदेवीलक्ष्मी, और

धनवंतरीकाजन्मसमुद्रमंथनकेसमयहुआथा।धन्वंतरीस्वास्थ्यऔरचिकित्साकेदेवताहैं।

धनतेरसकीरातको, लक्ष्मीऔरधनवंतरीकेसम्मानमेंदीये (दीपक) रातभरजलायेरखाजाताहै।

धनतेरसएकप्रमुखखरीदारीकादिनभीहै , विशेषरूपसेसोनेयाचांदीकेवस्तुओंकेलिएहै।व्यापारी

औरखुदराविक्रेताबिक्रीपरलेखडालकरवस्तुओंकीप्रदर्शनीलगाकर, इसदिनतैयाररखतेहैं।

कुछलोगअपनेदुकानों, कार्यस्थलयाऐसीवस्तुएंजोजीविकाऔरसमृद्धिकेस्रोतकाप्रतीकहै,

कोसजातेहै।

नरकचतुर्दशी (2 दिन)

नरकचतुर्दशीउत्सवकादूसरादिनहै aur इसेछोटीदिवालीभीकहाजाताहै।हिन्दूसाहित्यबतातेहैं


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किअसुर (राक्षस) नरकासुरकृष्णा, सत्यभामाऔरकालीद्वाराइसदिनमारागयाथा।यहदिनसुबह

धार्मिकअनुष्ठानऔरउत्सवकेशुरुआतकेसाथमनायाजाताहै।इसदिनकोआमतौरपरतमिलनाडु,

गोवाऔरकर्नाटकमेंदीवालीकेरूपमेंमनायाजाताहै।घरकीसजावटकियाजाताहैऔररंगीनफर्श

पैटर्नरंगोलीबनायाजाताहै।इसअवसरपरएकसुगंधिततेलस्नानकेरूपमेंविशेषस्नानअनुष्ठान

कुछक्षेत्रोंमेंआयोजितकियाजाताहैजिसकेबादछोटीपूजाभीहोतीहै।महिलाएंमेहंदीडिजाइनसे

अपनेहाथोंकोसजतीहैं।

लक्ष्मीपूजा (3 दिन)


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मिठाईदीवालीउत्सवकेलिएभारतभरमेंलोकप्रियहैं

दिवालीकात्यौहार,तीसरेदिनमुख्यउत्सवकेरूपमेंमनायाजाताहै।जैसेशामहोनेलगतीहैलोगनए

कपड़ेयाअपनासर्वश्रेष्ठपरिधानपहनतेहैं।फिरदियेजलायेजातेहैंऔरलक्ष्मीकीपूजाकीजाती

है।क्षेत्रविशेषपरदेवीलक्ष्मीकेसाथसाथएकयाएकसेअधिकअतिरिक्तदेवताओंकोभीपूजन

कियाजाताहै।आमतौरपरलक्ष्मीकेसाथसाथगणेश, सरस्वती, औरकुबेरकीपूजाभीकीजातीहै।

लक्ष्मीधनऔरसमृद्धिकाप्रतीकहै,उसकेआशीर्वादसेआगेआनेवालेवर्षकेलिएशुभत्वकी

कामनाकीजातीहै।

ऐसीमान्यताहैकीलक्ष्मीदिवालीकीरातपृथ्वीपरघूमतीहैं।दीवालीकीशामको, लोगअपनेदरवाजे

औरखिड़कियांलक्ष्मीकेस्वागतकेलिएखोलदेतेहैं।लक्ष्मीकेस्वागतकेलिएरोगखिडकियोंऔर

बालकनियोंमेंदीपकजलातेहैं।इसदिनपर, माताओंको , जोवर्षभरकड़ीमेहनतकरतीहै, परिवार

द्वारामान्यताप्राप्तहैंकिउन्हेंलक्ष्मीकेअवतारकेएकहिस्साकेरूपमेंदेखाजाताहै।मंदिरोंऔर

घरोंकीरेलिंगपरकुछहिंदुओंद्वारातेलसेभरेछोटेमिट्टीकादीपकपंक्तियोंमेंरखेजातेहैं।कुछलोग

नदियोंऔरजलधाराओंपरदीपकजलाकररखतेहैं।रिश्तेदारोंऔरदोस्तोंकेघरजाकर, उपहारऔर

मिठाइयोंकाआदानप्रदानकरनेसे, महत्वपूर्णसम्बन्धियोंऔरदोस्तोंसेइसदिनपहचानभीबढ़ती

है।

पूजाकेबाद, लोगघरोंसेबाहरनिकलकर (आतिशबाजी) करतेहैंऔरपटाखेजलातेहैं।बच्चे, छोटे

फुलझड़ियाँऔरआतिशबाजीकीविविधताकाआनंदलेतेहैंतो , वयस्कजमीनचक्र, विष्णुचक्र, फूल

केबर्तन (anar), सुतलीबम, रॉकेटऔरबड़ाआतिशबाजीकेसाथखेलकाआनंदलेतेहैं।आतिशबाजी

दीवालीकेजश्नकोदर्शाताहै, साथहीयहएकतरहसेबुरीआत्माओंकोदूरपीछाकरनेकाकामभी

करताहै।आतिशबाजीकेबाद, लोगवापसपरिवारकेसाथबातचीतकरतेहैंऔरमिठाईतथाभोजका

आनंदलेतेहैं।

पड़वा, बलिप्रतिपदा (4 दिन)


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दिवालीकात्यौहारलक्ष्मीपूजासमापनकेबादप्रतिपदाकोपड़वाउत्सवमनायाजाताहै।यहदिन

पत्नीऔरपतिकेबीचआपसीप्रेमऔरसमर्पणकेलिएमनायाजाताहै।पतिअपनीपत्नीकोअच्छे

उपहारदेताहै।कईक्षेत्रोंमें, अपनेपतिकेसाथनवविवाहितबेटियोंकोविशेषभोजनकेलिए

आमंत्रितकियाजाताहै।भाईअपनीबहनकोइसप्रमुखत्यौहारकोअवसरपरससुरालसेबुलाकर

लाताहै।शादीशुदाजोड़ेकेलिएयहदुनियामेंकहींऔरमनायेजानेवालेवर्षगाँठकेसमानएकविशेष

दिनहै।दीवालीकेबादश्रद्धालुभगवानकृष्णकेसम्मानमेंगोवर्धनपूजाकरतेहैं।

भारत

दीवालीकोनएसालकीशुरुआतकेरूपमेंभीजानाजाताहै।व्यापारीऔरदुकानदारकोअपनेपुरानेसाल

के

कुछ

भागों

में,

जहां

हिंदू

विक्रम

संवत्

कैलेंडर

लोकप्रिय

है,

वहां


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कीक्लोजिंगकरतेहैं, औरलक्ष्मीऔरअन्यदेवताओंसेआशीर्वादकेसाथएकनएवित्तीयवर्षशुरू

करतेहैं।

भाईदूज, भैयादूज (5 दिन)

पांचदिनतकचलनेवालादिवालीकात्यौहारकाअंतिमदिनभाईदूजकहाजाताहै (भाईकीदूसरी) या

भाईटीकानेपालमें , जहांयहत्योहारकाएकप्रमुखदिनहै।यहत्यौहारबहन-भाईप्रेमसंबंधकेरूप

मेंमनायाजाताहै।यहउत्सवरक्षाबंधनकीतरहभाईबहनकात्यौहारहैलेकिनभिन्नअनुष्ठानोंके

साथमनायाजाताहै।यहदिनभाईबहनकेबीचधार्मिकप्रेमऔरआजीवनरिश्तोंकेमजबूतीकेतौर


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परमनायाजाताहै।इसदिनमहिलाएंऔरलड़कियांएकसाथमिलतीहैं, अपनेभाइयोंकीभलाईकेलिए

प्रार्थनाकेसाथएकपूजाकरतीहैं।उसकेबादभोजनकेबंटवारेऔरबातचीतकेबाद, उपहारदेनेरस्म

होताहै।पुरानेज़मानेमेंशरदऋतूमेंयहएकख़ासदिनथाजबभाईअपनेबहनसेमिलनेबहनके

ससुरालजायाकरताथाऔरबहनकोअपनेघरभाईदूजकाउत्सवमानानेकेलियालायाकरताथा।

दिवालीकात्यौहारदीपावली 30 अक्टूबर 2016धनतेरसदिवस (1)नरकचतुर्दशी (2 दिन)पड़वाबलिप्रतिपदा (4 दिन)भाईदूजभैयादूज (5 दिन)लक्ष्मीपूजा

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